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Thursday, November 12, 2009

Being Together

साथ रहते रहते
कई बरस सरक चुके
जो कुछ बच गए
वो भी गुज़र जायेंगे

जब भी मैंने
नटखट सूरज को देखा
नदी को गुदगुदा हंसाते
मैंने भी अपना साथ ढूँढा |

आँसू और अलगाव का
गहरा सम्बन्ध है
हँसी और ठराव भी घनिष्ठ हैं...
जहाज़ सा हो  गया   हूँ मैं
जो नदी पर बह तो रहा है
पर उसकी गहराई नहीं माप सकता,
डूब कर सांस ले रहा हूँ -
खुले में दम घुटने लगा है
विषाद की ऊँगली थाम हँसता हूँ
खुद ही बेकार सा हो चला हूँ |

तुम दूर दिखती हो मुझे
एक धुंधले धुएँ सी
पकड़ लूँ, थाम लूँ
बस यही सोच चुप रह जाता हूँ |

कई बरस बीत चुके
साथ रहते रहते...
और जो बचे हैं
वो भी गुज़र जायेंगे
     

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