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Friday, January 1, 2010

Ras Dhvani

तुम्हारी आँखों में चमकती शरारत
हर पल खनकती, ठहरती हँसी
हमारे आँगन में दौड़ती-फिरती
धूप हो तुम...

गिलहरी देख चहक उठती हो
रंग-बिरंगी ओरियोले  की तरह
पोल्का dot वाली पीली frock में,
दादी की उंगली थाम मंदिर में
माथा टेकती तुम
हमारे विश्वास को दोहरा करती हो |

दीदी की हर किताब पर
अपनी छवी छोड़ने की तुम्हारी चाह
मुस्कुराते हुए धीमे से , चुगलखोरी करते...
खिलखिलाती हँसी छिटक कर
सिसकने लगती है...

आरोही, तुमने हमारे जीवन में
संगीत का रस घोला ...
हमारे आँगन में बजती हुई
रस ध्वनि हो तुम....

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